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26 साल पहले के मामले पर झारखंड हाई कोर्ट ने कहा, "रात में किसी महिला के घर में घुसना और उसके कपड़े उठाना रेप का प्रयास नहीं"

 Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Sep 08, 2026 08:37 am IST,  Updated : Sep 08, 2026 08:37 am IST

झारखंड हाई कोर्ट ने 26 साल पुराने एक मामले में टिप्पणी करते हुए अहम बात कही। हाई कोर्ट ने कहा कि रात में किसी महिला के घर में घुसना और उसके कपड़े उठाना रेप का प्रयास नहीं माना जा सकता।

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झारखंड हाई कोर्ट की टिप्पणी Image Source : INDIA TV

रांची: रेप को लेकर झारखंड हाई कोर्ट की एक टिप्पणी चर्चा में है। दरअसल एक मामले में सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट ने कहा, "रात में किसी महिला के घर में घुसना और उसके कपड़े उठाना रेप का प्रयास नहीं है बल्कि ये महिला की गरिमा को भंग करने और आपराधिक रूप से बल के इस्तेमाल का मामला है।"

क्या है पूरा मामला?

दरअसल झारखंड हाई कोर्ट में 26 साल पुराने मामले में दोषी की अपील पर सुनवाई हो रही थी। इसी मामले में झारखंड हाई कोर्ट की ये टिप्पणी सामने आई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में निचली कोर्ट के फैसले में बदलाव भी किया और कहा कि रेप का मामला नहीं है बल्कि महिला की गरिमा भंग करने और आपराधिक बल के प्रयोग का मामला है।

न्यायमूर्ति ने क्या कहा? 

न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा, "रेप किए जाने के पर्याप्त रूप से निकट कोई विशिष्ट प्रत्यक्ष कृत्य भी भारतीय दंड संहिता के तहत रेप के प्रयास का अपराध नहीं माना जाएगा।" प्रत्यक्ष कृत्य का मतलब ये है कि अपराध करने की योजना को आगे बढ़ाने के लिए जो भी कदम उठाया गया हो।

बता दें कि ये फैसला 31 अगस्त को सुनाया गया था लेकिन इसे जारी सोमवार (7 सितंबर) को किया गया।

26 साल पहले के मामले में सामने आई हाई कोर्ट की ये बात

घाटशिला सत्र अदालत द्वारा 25 जुलाई, 2006 को दोषी को 4 साल के सश्रम कारावास की सजा मिली थी। इसी मामले को दोषी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। ऐसे में अब हाई कोर्ट ने सजा में बदलाव भी किया और कहा कि अपील करने वाला पहले ही 8 महीने हिरासत में रह चुका है। इतनी हिरासत पर्याप्त है।

पीड़िता ने क्या आरोप लगाए थे?

मामले में दोषी पर पीड़िता द्वारा आरोप लगाए गए थे कि वह रात में उसके घर में घुसा और रेप करने के इरादे से उसके कपड़े उठाने की कोशिश की। इसी मामले में आरोपी को कोर्ट ने रेप के प्रयास का दोषी ठहराया और 4 साल की कारावास की सजा सुनाई थी। बता दें कि इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट के फैसले की हर तरफ चर्चा हो रही है। (इनपुट: भाषा)

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